Khule Baal Shayari in Hindi - खुले बालों पर शायरी

Khule Baal Shayari

Khule Baal Shayari in Hindi | खुले बालों पर शायरी

बड़ी आरज़ू थी मोहब्बत को बेनकाब देखने की, दुपट्टा जो सरका तो तेरे बालों की दीवार बन गयी…
जो गुजरे इश्क में सावन सुहाने, याद आते हैं, तेरी बालों के मुझको शामियाने याद आते हैं…
दिसम्बर से भी ठण्डा है तेरे बालों का साया, जी चाहता है की जून तेरे पास आकर गुजारूं…
तेरे बालों की छाँव के भी तजुर्बे अजब रहे, जब-जब किया तूने साया, झुलसता ही रहा हूँ…
ये रात की तन्हाई, और ज़िक्र तेरे बालों का, क्या खूब रात भी क़ैद थी तेरे बालों के तले…

खुले बालों पर शायरी

तेरी आँखों की नमकीन मस्तियाँ, हंसी की बेपरवाह गुस्ताखियाँ, तेरी जुल्फों की लहराती अंगड़ाइयाँ, नहीं भूलूंगा मैं… जब तक है जान, जब तक है जान…
छेड़ आती हैं कभी होंठो को कभी रुक्सारों को, तुमने जुल्फों को अपनी बहुत सर चड़ा रखा है…
किन लफ्जों में लिखूँ मैं अपने इन्तजार को तुम्हें, बेजुबां है इश्क़ मेरा ढूँढता है खामोशी से तुझे…
मेरे हमदम तुम्हें बड़ी फुर्सत में बनाया है, जुल्फें ये तुम्हारी बादल की याद दिला दें, नज़र भर देख लो जो किसी को, नेक दिल इंसान की भी नियत बिगड़ जाए…
पूछा जो उनसे चाँद निकलता है किस तरह, ज़ुल्फ़ों को रूख पे डाल के झटका दिया कि यूँ…