Thokar Shayari in Hindi - ठोकर शायरी

Thokar Shayari in Hindi
ठोकर शायरी

(1)
शमा परवाने को जलाना सिखाती है,
शाम सूरज को ढलना सिखाती है,
मुसाफिर को ठोकरों से होती तो हैं तकलीफें,
लेकिन ठोकरें ही मुसाफिर को चलना सिखाती हैं…


(2)
कुछ ठोकरों के बाद नजाकत आ गयी है मुझ में,
मैं अब दिल के मशवरों पर भरोसा नहीं करता…


(3)
ए-ज़िन्दगी, इतनी ठोकरे देने के लिए शुक्रिया,
चलने का न सही सम्भलने का हुनर तो आया…


(4)
जब तक न लगे बेवफाई की ठोकर,
हर किसी को अपनी पसंद पर नाज़ होता है…


(5)
जो फकीरी मिजाज रखते हैं
वो ठोकरों में ताज रखते हैं,
जिनको कल की फ़िक्र नहीं
वो मुठ्ठी में आज रखते हैं…

(6)
मेरी तकदीर में जलना है तो जल जाऊँगा,
मैं कोई तेरा वादा तो नहीं जो बदल जाऊँगा,
मुझको न समझाओ मेरी जिंदगी के उसूल,
मैं खुद ही ठोकर खा के संभल जाऊँगा…


(7)
कुछ ठोकरों के बाद नज़ाक़त आ गई मुझ में,
अब दिल के मशवरों पे मैं भरोसा नहीं करता…


(8)
जो फकीरी मिजाज रखते हैं
वो ठोकरों में ताज रखते हैं,
जिनको कल की फ़िक्र नहीं
वो मुठ्ठी में आज रखते हैं…


(9)
कच्ची दीवार हूँ ठोकर ना लगाना मुझे,
अपनी नज़रों में बसा कर ना गिराना मुझे,
तुमको आँखों में तसव्वुर की तरह रखता हूँ,
दिल में धड़कन की तरह तुम भी बसाना मुझे…


(10)
मिल भी जाते हैं तो कतरा के निकल जाते हैं,
हैं मौसम की तरह लोग… बदल जाते हैं,
हम अभी तक हैं गिरफ्तार-ए-मोहब्बत यारों,
ठोकरें खा के सुना था कि संभल जाते हैं…