Teer Nishana Shayari in Hindi - तीर निशाना शायरी

Teer Nishana Shayari in Hindi

(1)
हौंसले के तरकश में ,
कोशिश का वो तीर ज़िंदा रख ,
हार जा चाहे ज़िन्दगी में सब कुछ ,
मगर फिर से जीतने की उम्मीद ज़िंदा रख…


(2)
ना तीर न तलवार से मरती है सचाई,
जितना दबाओ उतना उभरती है सचाई,
ऊँची उड़ान भर भी ले कुछ देर को फ़रेब,
आख़िर में उसके पंख कतरती है सचाई…


(3)
फलक के तीर का क्या निशाना था,
इधर मेरा घर, उधर उसका आशियाना था,
पहुंच रही थी किनारे पे कश्ती-ऐ-उम्मीद,
उसी वक़्त इस तूफ़ान को भी यहां आना था…

Teer E Nazar Shayari

(4)
एक हसीना देखे और तीर जिगर के पार हो जाए,
काश !!! इस कदर हमें भी प्यार हो जाए…


(5)
हम वो तीर हैं जो हिमालय को चीर कर,
अपना रास्ता बना सकते हैं,
कोई साथ हमारा दे या न,
हम अकेले ही दुनिया हिला सकते हैं…


(6)

जो तीर भी आता वो खाली नही जाता,
मायूस मेरे दिल से सवाली नहीं जाता,
काँटे ही किया करते हैं फूलों की हिफ़ाजत,
फूलों को बचाने कोई माली नहीं आता…


(7)
तीर तेरी तरफ़ ही आएगा,
तू चाँद-तारों का शिकार मत करना,
डूब जाने का जिसमें खतरा है,
ऐसे दरिया को पार मत करना…

Nazar Shayari in Hindi

(8)
जब लगा था तीर तब इतना दर्द न हुआ ग़ालिब…
ज़ख्म का एहसास तब हुआ,
जब कमान देखी अपनों के हाथ में…


(9)
क़त्ल तो नहीं बदला क़त्ल की अदा बदली,
तीर की जगह क़ातिल साज़ उठाए बैठा है…


(10)
तू मेरे दिल पे लगी तीर बनके रह गयी हैं,
जिन्दगी जख्म की तस्वीर बनके रह गयी हैं…