Sharafat Shayari in Hindi - शराफत शायरी

Sharafat Shayari in Hindi

(1)
जो तुम मगरूर तो हो मुझे मगरूर मत समझो,
मेरी इन रास्तों को मंज़िलो से दूर मत समझो,
शराफत को मेरी कमज़ोरी का नाम मत देना,
मैं चुप हु सोचकर के कुछ मुझे मजबूर मत समझो…
Anamika Jain ‘Amber’


(2)
चाहते तो हम भी थे जीना शराफत से,
सियासत क्या मिली, शराफत चली गयी…


(3)
मेरा रब जब भी सवालात करेगा अगर क़यामत में,
तो हम भी कह देंगे लुट गए हम शराफत में…


(4)
लूटेगें लोग बड़े इत्मिनान से तुझको
तुम्हारे लहजे से शराफत झलकती है…


(5)
अपनी आँखों में शराफत के उजाले रखना,
कितना मुश्किल है विरासत को सम्भाले रखना,
अक्ल कहती ये इश्क का जूनून फिजूल है,
दिल ये कहता है कि इस रोग को पाले रखना…


(6)
मेरी गुरबत को शराफत का अभी नाम न दे,
वक्त बदला तो गिरी राय बदल जायेगी…
निदा फाजली


(7)
कभी शराफत मुझे दिखाकर
दिल के टुकड़े करते हो,
फिर दर्द को मेरे गले लगा कर
जख्म हरे भी करते हो…


(8)
जानते है हम शराफत आपकी,
आँख करती है शरारत आपकी,
कत्ल हो जाता है लहू बहता नही
ऐसी कातिल है नजाकत आपकी….


(9)
करने लगे है इश्क का दावा वो आजकल,
नजरों में उनकी अब वो शराफत नही रही…


(10)
अजब जलवे दिखाए जा रहे है,
खुदी को हम भुलाए जा रहे है,
शराफत कौन सी चिड़िया है आखिर
फकत किस्से सुनाए जा रहे है…