Sanam Teri Kasam Shayari - कसम शायरी

Sanam Teri Kasam Shayari in Hindi

(1)

मौसम को मौसम की बहारों ने लूटा,
हमे कश्ती ने नहीं किनारों ने लूटा,
आप तो डर गये मेरी एक ही कसम से,
आपकी कसम देकर हमें तो हज़ारों ने लूटा…


(2)

तुमको यकीन नही मुझपर,
तो फिर कसमों पर कैसे यकीन आएगा,
तुझे यकीन दिलाने की खातिर,
दिल अपना चीर कर कौन दिखायेगा…


(3)
तू एकबार मेरी निगाहो मे देख कर कह दे,
कि हम तेरे काबिल नही,
कसम तेरी चलती साँसो की,
हम तुझे देखना तक छोड़ देंगे…

(4)

सौ बार समझाया इस दिल को हमने,
100 बार दिल टूट गया,
सौ बार उसे भूलने की कसम खायी हमने,
हर बार कसम दिल भूल गया…


(5)

कसम खाया था ना दुबारा मिलेंगे
फिर उसी राह पे निकल पड़े हैं,
तेरी यादों को मिटा दिया,
फिर भी तेरी चौखट पर खड़े हैं…

Kasam Teri Kasam Shayari

(6)

हम तो तेरे दिल की महफ़िल सजाने आये थे,
तेरी कसम तुझे अपना बनाने आये थे,
किस बात की सजा दी तुमने हमको,
बेवफ़ा, हम तो तेरे दर्द को अपनाने आये थे…


(7)

गम नही ये कि कसम अपनी भुलाई तुमने,
गम तो ये है कि रकीबों से निभाई तुमने,
कोई रंजिश थी अगर तुमको तो मुझसे कहते,
बात आपस की थी, क्यूँ सब को बताई तुमने…


(8)

आप ने कसम खाई थी दोस्ती निभाने की,
फिर क्यों करते हो बातें हमे सताने की,
हम इसलिए लड़ते है सबके सामने,
क्योंकि नजर लग जाती है रिश्तों को जमाने की…


(9)

हर कदम हर पल साथ हैं,
दूर होकर भी हम आपके पास हैं,
आपका हो न हो पर हमें आपकी कसम,
आपकी कमी का हर पल अहसास हैं…


(10)

मंजिल भी उसी की थी रास्ता भी उसका था,
एक हम अकेले थे काफ़िला भी उसका था,
साथ-साथ चलने की कसम भी उसी की थी,
और रास्ता बदलने का फ़ैसला भी उसका था…

Teri Kasam Shayari

(11)

कसम से बहुत सताते हो तुम,
अक्सर बिना आवाज, बिना दस्तक, दबे पाँव,
मेरे ख्यालों में चले आते हो तुम…


(12)

एक दिल मेरे दिल को जख्म दे गया,
ज़िन्दगी भर जीने की कसम दे गया,
लाखों फूलों में से एक फूल चुना हमने,
जो काँटों से गहरी चुभन दे गया…


(13)

हम तुम्हे कभी खोना नहीं चाहते,
कसम खुदा की तुम्हारे सिवा,
हम किसी और के होना नहीं चाहते…


(14)

तोड़ दो ना वो कसम जो खाई हैं,
कभी कभी याद करने में क्या बुराई हैं,
याद आप को किये बिना रहा भी नहीं जाता,
दिल में जगह आपने ऐसी जो बनाई हैं…


(15)

बदलना आता नहीं हमें मौसम की तरह,
हर इक रूप में तेरा इंतजार करते हैं,
ना तुम समझ सकोगे जिसे कयामत तक,
कसम तुम्हारी तुम्हें हम इतना प्यार करते हैं…


(16)

जब भी किसी को करीब पाया है,
कसम ख़ुदा की उसी से धोखा खाया है,
क्यों दोष देते है हम काँटों को,
जख्म तो हमने फूलों से ही पाया हैं…


(17)

परछाई बनकर जिन्दगी भर,
तेरे साथ चलने का इरादा हैं,
तोड़कर दुनिया की सारी रस्में-कसमें,
तेरे साथ जीने का वादा हैं…