Ruswai Shayari in Hindi - रुसवाई शायरी

Ruswai Shayari in Hindi

(1)
तेरी चाहत में रुसवा यूँ सरे बाज़ार हो गये,
हमने ही दिल खोया और हम ही गुनहगार हो गये…


(2)
जमाने भर की रुसवाईयाँ और बेचैन रातें,
ऐ दिल कुछ तो बता ये माजरा क्या है…


(3)
खुलता किसी पे क्या मेरे दिल का मामला,
शायरों के इन्तिखाब ने रुसवा किया मुझे…


(4)
कुछ कमी रह गयी है शायद मेरी रुसवाइयों में,
तुझसे से फिर मैं दिल लगाना चाहता हूँ…


(5)
ना कर दिल अजारी, ना रुसवा कर मुझे,
जुर्म बता, सज़ा सुना और किस्सा खत्म कर…


(6)
फिर उसी की याद में दिल बेक़रार हुआ है,
बिछड़ के जिस से हुयी शहर शहर रुसवाई…


(7)
कैसे कह दूँ कि मुझे छोड़ दिया है उसने,
बात तो सच है मगर बात है रुसवाई की…


(8)
अपनी रुसवाई तेरे नाम का चर्चा देखूं,
एक जरा शेर कहूँ और मैं क्या क्या देखूं…


(9)
क्या मिला तुम को मेरे इश्क़ का चर्चा कर के,
तुम भी रुस्वा हुए आख़िर मुझे रुस्वा कर के…


(10)
तेरी साँसों की आहट को भी जब पहचानता हूँ मैं,
मुझे रुसवा करे तू इसकी गुंजाइश कहाँ है अब…