Pyar Ki Nishani Shayari - प्यार की निशानी शायरी

pyar ki nishani shayari

Pyar Ki Nishani Shayari | प्यार की निशानी शायरी

तू इश्क की दूसरी निशानी दे दे मुझको, आँसू तो रोज गिर कर सूख जाते हैं…
रख सको तो एक निशानी हैं हम, भूल जाओ तो एक कहानी हैं हम, ख़ुशी की धूप हो या हो ग़म के बादल, दोनों में जो बरसें वो पानी हैं हम…
किसी का रूठ जाना और अचानक बेवफा होना, मोहब्बत में यही लम्हा क़यामत की निशानी है…
न उड़ाओ यूं ठोकरों से मेरी खाके-कब्र ज़ालिम, यही एक रह गई है मेरे प्यार की निशानी…
वो नहीं आती पर निशानी भेज देती है, ख्वाबो में दास्ताँ पुरानी भेज देती है, कितने मीठे हैं उसकी यादो के मंज़र, मेरी आँखों में नमकीन पानी भेज देती है…
इश्क को सर का दर्द कहने वाले सुन, हमने तो ये दर्द अपने सर ले लिया, हमारी निगाहों से बचकर वो कहाँ जायेंगे, हमने उनके मोहल्ले में ही घर ले लिया...
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न उड़ाओ यूं ठोकरों से मेरी खाके-कब्र ज़ालिम, यही एक रह गई है मेरे प्यार की निशानी...
उम्र तमाम बहार की उम्मीद में गुजर गयी, बहार आई है तो पैगाम मौत का लाई है...
रख दी कायनात खुदा ने हमारे क़दमों में, मगर हमने तुम्हारी यादों का सौदा नहीं किया...
तू बेरूख हवा में चाहतों का दिया, जलाने की ज़िद न कर, ये क़ातिलों का शहर है, यहाँ मुस्कुराने की ज़िद न कर...