Nature Shayari in Hindi - नेचर या प्रकृति पर शायरी

Nature Shayari in Hindi

(1)
ऐ सावन तू क्यों इतनी बेरुखी कर रहा हैं,
ना वो समझती बारिश, ना कोई ख़ुशी दे रहा हैं,
क्या तेरी बदली तुझसे खफ़ा हो गयी,
या तू कही और दिल्लगी कर रहा हैं…


(2)
सावन का ये मौसम कुछ याद दिलाता हैं,
किसी के साथ होने का एहसास दिलाता हैं,
फ़िज़ा भी सर्द हैं यादें भी ताज़ा हैं,
ये मौसम किसी का प्यार दिल में जगाता हैं…


(3)
क़ुदरत क्या कहती है कैसे,
कहती है क्यों कहती हैं,
ये तो ऊपर वाले की आवाज़ हैं,
जो हमेशा कायम रहती हैं…


(4)
फूलों की सुगंध, मूँगफली की बहार,
सर्दी का मौसम आने को तैयार,
रजाई,स्वेटर रखो तैयार,
हैप्पी सर्दी का मौसम मेरे यार…


(5)
आज़ाद पंछी हूँ,
आज़ादी पसंद करती हूँ,
ना किसी को क़ैद रखती हूँ,
ना किसी की क़ैद में रहती हूँ…

नेचर या प्रकृति पर शायरी

(6)
नीचे गिरे सूखे पत्तों पर अदब से चलना जरा,
कभी कड़ी धूप में तुमने इनसे ही पनाह मांगी थी…


(7)
आज अम्बर में बादल छाए है,
बारिश के कुछ आसार लग रहे हैं,
हो जाए तो बहुत अच्छा है,
वरना पंखे कूलर भी अब अंगार लग रहे हैं…


(8)
क़ुदरत एक शायरी है,
जिसे ख़ुदा रोज़ लिखता हैं,
क़ुदरत एक आशिकी है,
जिसमें खुदाई का एहसास पलता हैं…


(9)
धरती गगन हवा पवन ये सब प्रकृति के फूल हैं,
इनके एहसास ही गुलों की खुशबू और गुलशन का उसूल हैं…


(10)
नसीब जिनके ऊँचे और मस्त होते हैं,
इम्तिहान भी उनके जबरदस्त होते हैं…