Maharana Pratap Shayari in Hindi - महाराणा प्रताप शायरी

Maharana Pratap Shayari in Hindi

(1)
सूरज का तेज भी फीका पड़ता था,
जब राणा तू अपना मस्तक ऊँचा करता था,
थी राणा तुझमें कोई बात निराली,
इसलिए अकबर भी तुझसे डरता था…


(2)
हर मां कि ये ख्वाहिश है कि,
एक प्रताप वो भी पैदा करे,
देख के उसकी शक्ती को,
हर दुश्मन उससे डरा कर…


(3)
प्रताप का सिर कभी नहीं झुका,
इस बात से अकबर भी शर्मिंदा था,
मुगल कभी चैन से सो न सके,
जब तक मेवाड़ी राणा जिन्दा था…


(4)
महाराणा प्रताप जैसे वीर,
हर हिन्दुस्तानी को प्यारा हैं,
मेवाड़ी सरदार के चरणों में,
शत-शत नमन हमारा हैं…


(5)
धन्य हुआ रे राजस्थान,
जो जन्म लिया यहां प्रताप ने,
धन्य हुआ रे सारा मेवाड़,
जहां कदम रखे थे प्रताप ने…

Maharana Pratap Jayanti Shayari

(6)
चढ़ चेतक पर तलवार उठा,
रखता था भूतल पानी को,
राणा प्रताप सिर काट काट,
करता था सफल जवानी को…


(7)
करता हूं नमन मैं प्रताप को,
जो वीरता का प्रतीक है,
तू लोह-पुरुष तू मातॄ-भक्त,
तू अखण्डता का प्रतीक है…


(8)
इकबाल था बुलंद, उसे धूल कर दिया,
मद जिसका था प्रचंड, सारा दूर कर दिया,
राणा प्रताप इकलौते थे ऐसे वीर,
जिसने अकबर का सारा घमंड,
चूर चूर कर दिया…


(9)
राजपुताने की आन है राणा,
राजपुताने की शान है राणा,
वीरों के लिए एक पैगाम है राणा,
भारत के वीर पुत्र का नाम है राणा…


(10)
आगे नदिया पड़ी अपार,
घोड़ा कैसे उतरे उस पार,
राणा ने सोचा इस पार,
तब तक चेतक था उस पार…