Kitab Shayari in Hindi - किताब शायरी

Kitab Shayari in Hindi

(1)

बेवकूफ़ होते है वो लोग,
जो किताब मे चेहरे डाल के पढ़ा करते है,
हम तो उनमे से है जो चेहरे को देख के,
किताब लिख दिया करते है…


(2)

दिल की किताब में गुलाब उनका था,
रात की नींदों में ख्वाब उनका था,
कितना प्यार करते हो जब हमने पूछा,
मर जायेंगे तुम्हारे बिना ये जवाब उनका था…


(3)

कई जीत बाकी है, कई हार बाकी है,
अभी तो जिन्दगी का सार बाकी है,
यहाँ से चले है नई मंजिल के लिए,
ये एक पन्ना था, अभी तो पूरी किताब बाकी है…

2 Line Kitab Shayari

(4)

नैना थे कहां आपके इतने शराबी पहले,
चेहरा था कहां आपका इतना किताबी पहले,
आइना तो ज़रा देखिए लबों को चूमने के बाद,
क्या होंठ थे आपके इतने गुलाबी पहले…


(5)

ज़िन्दगी के किताब में कुछ पन्ने ख़ास होते है,
कुछ अपने कुछ बेगाने होते है,
प्यार से सवार जाती है ज़िन्दगी,
जब रिश्तो में चॉकलेट की तरह मिठास होती है…

(6)

खुशियों से नाराज़ है मेरी ज़िन्दगी,
बस प्यार की मोहताज़ है मेरी ज़िन्दगी,
हँस लेती हूँ लोगों को दिखाने के लिए,
वैसे तो दर्द की किताब है मेरी ज़िन्दगी…


(7)

पढ़ने वालों की कमी हो गयी है आज इस ज़माने में,
नहीं तो गिरता हुआ एक-एक आंसू पूरी किताब है…


(8)

जिंदगी जीता हुँ खुली किताब की तरह,
ना कोई फरेब ना कोई लालच,
मगर मे हर बाजी खेलता हूँ बीना देखे क्योंकि,
ना मुझे हारने का गम ना जीतने का जश्न…


(9)

वो कटी फटी हुई पत्तियां,
और दाग़ हल्का हरा हरा,
वो रखा हुआ था किताब में,
मुझे याद है वो ज़रा ज़रा…


(10)

किताब-ए-दिल का कोई भी पन्ना सादा नहीं होता,
निगाह उस को भी पढ़ लेती है जो लिखा नही होता…