Khamoshi Shayari in Hindi - ख़ामोशी शायरी

Khamoshi Shayari in Hindi

(1)

मेरी खामोशी थी जो सब कुछ सह गयी,
उसकी यादें ही अब इस दिल में रह गयी,
थी शायद उसकी भी कोई मज़बूरी,
जो मेरी जिंदगी की कहानी अधूरी ही रह गयी…


(2)

हर इल्जाम का हकदार वो हमे बना जाते है,
हर खता कि सजा वो हमे सुना जाते है,
हम हर बार खामोश रह जाते है,
क्योकि वो अपना होने का हक जता जाते है…


(3)

रात हुई जब हर शाम के बाद,
तेरी याद आयी हर बात के बाद,
हमने खामोश रह कर भी महसूस किया,
तेरी आवाज़ आयी हर सांस के बाद…

Khamoshi Bhari Shayari

(4)

जब खामोश आँखो से बात होती है,
ऐसे ही मोहब्बत की शुरुआत होती है,
तुम्हारे ही ख़यालो में खोए रहते हैं,
पता नही कब दिन और कब रात होती है…


(5)

मुझे खामोश देखकर इतना हैरान क्यों होते हो दोस्तों,
कुछ नहीं हुआ है बस भरोसा कर के धोखा खाया है…


(6)

मुझे खामोश राहों में तेरा साथ चाहिए,
तन्हा है मेरा हाथ तेरा हाथ चाहिए,
जूनून-ए-इश्क को तेरी ही सौगात चाहिए,
मुझे जीने के लिए तेरा ही प्यार चाहिए…

(7)

इस नजर ने उस नजर से बात करली,
रहे खामोश मगर फिर भी बात करली,
जब मोहब्बत की फ़िज़ा को खुश पाया,
तो दोनों निगाहों ने रो रो कर बरसात करली…


(8)

जब खामोश आँखों से बात होती है,
तो ऐसे ही मोहब्बत की शुरुआत होती है,
तेरे ही ख्यालों में खोये रहते हैं,
न जाने कब दिन और कब रात होती है…


(9)

चलो आज खामोश प्यार को इक नाम दे दें,
अपनी मुहब्बत को इक प्यारा सा अंज़ाम दे दें,
इससे पहले की कहीं रूठ न जाएँ मौसम,
अपने धड़कते हुए अरमानों को एक सुरमई शाम दे दें…

Khamoshi Dard Bhari Shayari

(10)

ख्वाइश तो यही है कि तेरी बाँहों में पनाह मिल जाये,
शमा खामोश हो जाये और शाम ढल जाये,
मोहब्बत तू इतना करे कि इतिहास बन जाये,
और तेरी बाँहों से हटने से पहले ये शाम हो जाये…


(11)

मेरी खामोशी थी जो सब कुछ सह गयी,
उसकी यादें ही अब इस दिल में रह गयी,
थी शायद उसकी भी कोई मज़बूरी,
जो मेरी जिंदगी की कहानी अधूरी ही रह गयी…


(12)

वादियों से सूरज निकल आया है,
फिजाओं में नया रंग छाया है,
खामोश क्यों हो अब तो मुस्कुराओ,
आपकी मुस्कान देखने नया सवेरा आया है…