Katil Shayari in Hindi - कातिल शायरी

Katil Shayari

(1)
अजल को दोष दें, तकदीर को रोयें, मुझे कोसें,
मेरे कातिल का चर्चा क्यों है मेरे सोगवारों में 💔


(2)
होश उड़ जाएंगें मेरे कातिल के,
कोई उसे बता दे कि मैं जिंदा हू अभी…


(3)
शोख़ी से ठहरती नहीं क़ातिल 💔 की नज़र आज,
ये बर्क़-ए-बला देखिए गिरती है किधर आज…


(4)
आज मौसम कुछ नया रंग ले के आया है,
बारिश में हलकी सी धूप ले के आया है,
एक बात समझ नहीं आती दया कि,
आखिर कातिल ने हथियार कहाँ छुपाया है?


(5)
ये अलग बात है दिखाई न दे मगर शामिल जरूर होता है,
खुदकुशी करने वाले का भी कोई कातिल जरूर होता है…


(6)
इतना खुबसूरत कैसे मुस्कुरा लेते हो,
इतना कातिल कैसे शरमा लेते हो,
कितनी आसानी से जान ले लेते हो,
किसी ने सिखाया है…
या बचपन से ही कमीने हो?


(7)
जब जान प्यारी थी तब दुश्मन हजार थे,
अब मरने का शौक है तो कातिल नहीं मिलते…


(8)
लम्हा लम्हा सांसें ख़त्म हो रही हैं,
जिंदगी मौत के आगोश में सो रही है,
उस बेवफा से न पूछो मेरी मौत के वजह,
वही तो कातिल है दिखाने को रो रही है…


(9)
रखते थे होठों पे उंगलियां जो मरने के नाम से,
अफसोस वही लोग मेरे दिल ❤️ के कातिल निकले…


(10)
अक्ल कहती है ना जा
कूचा-ए-क़ातिल की तरफ,
सरफ़रोशी की हवस कहती है
चल क्या होगा…