Kafan Shayari in Hindi - कफन शायरी

Kafan Shayari in Hindi
कफन शायरी

(1)
आंखें खुली हो तो चेहरा तुम्हारा हो,
आँखें बंद हो तो सपना तुम्हारा हो,
मुझे मौत का डर नहीं होगा,
अगर कफ़न की जगह दुपट्टा तुम्हारा हो…


(2)
आखिरी दीदार कर लो खोल कर मेरा कफ़न,
अब ना शरमाओ कि चश्म ए मुन्तजिर बेनूर है…


(3)
तमाम उम्र जो हमसे बेरुखी की सबने,
कफ़न में हम भी अजीज़ों से मुँह छुपा के चले…


(4)
इंसाँ की ख़्वाहिशों की कोई इंतिहा नहीं,
दो गज़ ज़मीं भी चाहिए दो गज़ कफ़न के बाद…


(5)
या खुदा मेरी दुआओं में इतना असर कर दे,
खुशियाँ उसे दर्द उसका मुझे नजर कर दे,
दिलों से दूरिओं का एहसास मिटा दे ऐ मौला,
नहीं तो उसके आँचल को मेरा कफ़न कर दे…


(6)
वादे भी उसने क्या खूब निभाए हैं,
ज़ख्म और दर्द तोहफे में भिजवाए हैं,
इस से बढ़कर वफ़ा कि मिसाल क्या होगी,
मौत से पहले कफ़न का सामान ले आये हैं…


(7)
यहाँ गरीब को मरने की जल्दी यूँ भी है,
कि कहीं कफ़न महंगा ना हो जाए…


(8)
कितना दर्द है दिल में दिखाया नहीं जाता,
किसी की बर्बादी का किस्सा सुनाया नहीं जाता,
एक बार जी भर के देख लो इस चहेरे को,
क्योंकि बार बार कफ़न उठाया नहीं जाता…


(9)
हुआ जब इश्क़ का एहसास उन्हें,
आकर वो पास सारा दिन रोते रहे,
हम भी निकले खुदगर्ज़ इतने यारो,
कफ़न में आँखें बंद करके सोते रहे…


(10)
कैसी अजीब तुझसे यह जुदाई थी,
कि तुझे अलविदा भी ना कह सका,
तेरी सादगी में इतना फरेब था,
कि तुझे बेवफा भी ना कह सका…