Kabiliyat Shayari in Hindi - काबिलियत शायरी

Kabiliyat Shayari in Hindi

(1)
अभी तो असली मंजिल पाना बाकी है,
अभी तो इरादों का इम्तिहान बाकी है,
तोली है मुट्ठी भर जमीन,
अभी तोलना सारा आसमान बाकी है…


(2)
मुश्किलों से भाग जाना आसान होता है,
हर पहलू जिंदगी का इम्तिहान होता है,
डरने वालों को मिलता नहीं कुछ ज़िदगी में,
लड़ने वालों के कदमों में जहान होता है…


(3)
ना पूछो कि मेरी मंजिल कहाँ है,
अभी तो सफर का इरादा किया है,
ना हारूंगा हौंसला उम्र भर,
ये मैंने किसी से नहीं खुद से वादा किया है…


(4)
लाख दलदल हो, पाँव जमाए रखिये,
हाथ खाली ही सही, ऊपर उठाये रखिये,
कौन कहता है छलनी में, पानी रूक नही सकता,
बर्फ बन्ने तक, हौसला बनाये रखिये…


(5)
जो मुस्कुरा रहा है उसे दर्द ने पाला होगा,
जो चल रहा है उसके पाँव में छाला होगा,
बिना संघर्ष के इन्सान चमक नही सकता,
जो जलेगा उसी दिये में तो उजाला होगा…

(6)
डर मुझे भी लगा फ़ासला देख कर,
लेकिन मैं बढ़ता गया रास्ता देखकर,
खुद-ब-खुद मेरे नजदीक आती गई,
मेरी मंजिल, मेरा हौसला देखकर…


(7)
होके मायूस ना आँगन से उखाड़ो ये पौधे,
धूप बरसी है यहाँ तो बारिश भी यही पे होगी…


(8)
धार के विपरीत जाकर देखिये,
जिन्दगी को आजमा कर देखिये,
आंधियाँ खुद मोड़ लेंगी रास्ता,
एक दीपक तो जला कर देखिये…


(9)
जिन्दगी में सफलता पाने के लिए,
थोड़ा जोखिम उठाना पड़ता है,
सीढ़ियाँ चढ़ते समय ऊपर जाने के लिए,
नीचे की सीढ़ी से पैर हटाना पड़ता है…


(10)
सफलता एक चुनौती है इसे स्वीकार करो,
क्या कमी रह गई देखो और सुधार करो,
कुछ किए बिना ही जय जयकार नहीं होती,
कोशिश करने वालों की कभी हार नहीं होती…