Jhoot Shayari in Hindi - झूठ शायरी

Jhoot Shayari

(1)
तेरी आँखों से दूर जाने के भी लिए तैयार तो थे हम,
फिर इस तरह, नज़रें घुमाने की जरूरत क्या थी,
तेरे इक इशारे पर हम इल्जाम भी अपने सर ले लेते,
फिर बेवजह, झूठे इल्जाम लगाने की जरुरत क्या थी…


(2)
आरज़ू झूठ है,
आरज़ू का फरेब खाना नहीं,
खुश जो रहना हो जिंदगी में तुम्हे,
दिल कभी किसी से लगाना नहीं…


(3)
तेरे झूठे कसमें वादों से,
तेरे जलते सुलगते खावो से,
तेरी बेरहम दुआओं से,
नफरत करूँगा मैं…
जब तक है जान, जब तक है जान…


(4)
झूठ बोलते थे फिर भी कितने सच्चे थे हम,
यह उन दिनों की बात है जब बच्चे थे हम…


(5)
ये ख्वाब झूठे हैं और ये ख्वाहिशें अधूरी हैं,
मगर जिंदा रहने के लिए कुछ गलतफहमियां भी जरूरी है…


(6)
कुछ साँसे बची हैं आखिरी बार दीदार दे दो,
झूठा ही सही एक बार मगर तुम प्यार दे दो,
जिंदगी तो वीरान थी मौत भी गुमनाम ना हो,
मुझे गले लगा लो फिर मौत मुझे हजार दे दो…

Jhoot Mat Bolo Shayari

(7)
नाराज क्यूँ होते हो किस बात पे हो रूठे,
अच्छा चलो ये माना तुम सच्चे हम ही झूठे,
कब तक छुपाओगे तुम हमसे हो प्यार करते,
गुस्से का है बहाना दिल में हो हम पे मरते…


(8)
भीड़ में भी तन्हा रहना मुझको सिखा दिया,
तेरी मोहब्बत ने दुनिया को झूठा कहना सिखा दिया,
किसी दर्द या ख़ुशी का एहसास नहीं है अब तो,
सब कुछ ज़िन्दगी ने चुप-चाप सहना सिखा दिया…


(9)
सीख नहीं पा रहा हूँ मीठे झूठ बोलने का हुनर,
कड़वे सच से हमसे न जाने कितने लोग रूठ गये…


(10)
कहते हैं कि हम उनकी झूठी ही तारीफ करते हैं,
ऐ खुदा इतना करम कर दे –
बस एक दिन के लिए आईने को जुबान दे दे…