Javed Akhtar Shayari in Hindi - जावेद अख्तर की शायरी

Javed Akhtar Shayari in Hindi
जावेद अख्तर की शायरी

(1)
खो गयी है मंजिले,
मिट गए है सारे रस्ते,
सिर्फ गर्दिशे ही गर्दिशे,
अब है मेरे वास्ते…


(2)
कभी यूँ भी तो हो…
ये बादल ऐसा टूट के बरसे,
मेरे दिल की तरह मिलने को तुम्हारा दिल भी तरसे,
तुम निकलो घर से …
कभी यूँ भी तो हो…
तनहाई हो, दिल हो,
बूँदें हो, बरसात हो,
और तुम आओ …


(3)
झूठे इल्जाम मेरी जान लगाया ना करो,
दिल हैं नाजूक इसे तुम ऐसे दुखाया ना करो,
झूठे इल्जाम मेरी जान लगाया ना करो…


(4)
किसी को क्या बताये कि कितना मजबूर हूं,
चाहा था सिर्फ एक तुमको और तुमसे ही दूर हूं…


(5)
काश ! कोई हम पर भी इतना प्यार जताती,
पीछे से आकर वो हमारी आँखों को छुपाती,
हम पूछते की कौन हो आप …??
और वो मुस्कुरा कर खुद को हमारी जान बताती…


(6)
मुसीबत में शरीफों की शराफत कभी कम नहीं होती,
सोने के कितने भी टुकड़े करदो,
उसकी कीमत कभी कम नहीं होती…


(7)
प्यार करते हो मुझसे तो इज़हार कर दो,
अपनी मोहब्बत का ज़िकर आज सरे आम कर दो,
नहीं करते अगर सच्ची मोहब्बत तो इंकार कर दो,
ये लो मेरा नादान दिल इसके टुकड़े हज़ार कर दो…


(8)
काश ! कोई चाहने का अरमान न होता,
मैं होश में रहते हुए अनजान न होता,
न प्यार होता किसी पत्थर दिल से हमको,
या फिर कोई पत्थर दिल इंसान न होता..