Ilzaam Shayari in Hindi - इलज़ाम शायरी

Ilzaam Shayari in Hindi

(1)

हर इल्जाम का हकदार वो हमे बना जाते है,
हर खता कि सजा वो हमे सुना जाते है,
हम हर बार खामोश रह जाते है,
क्योकि वो अपना होने का हक जता जाते है…


(2)

जानकर भी वो हमें जान ना पाए,
आज तक वो हमें पहचान ना पाए,
खुद ही कर ली बेवफ़ाई हम ने उनसे,
ताकि उन पर बेवफ़ाई का कोई इल्ज़ाम ना आए…

Sad Ilzam Shayari

(3)

बेवफ़ा तो वो ख़ुद हैं,
पर इल्ज़ाम किसी और को देते हैं,
पहले नाम था मेरा उनके लबों पर,
अब वो नाम किसी और का लेते हैं…


(4)

झूठे इल्जाम मेरी जान लगाया ना करो,
दिल हैं नाजूक इसे तुम ऐसे दुखाया ना करो,
झूठे इल्जाम मेरी जान लगाया ना करो…


(5)

बस यही सोचकर कोई सफाई नहीं दी हमने,
कि इलज़ाम झूठे ही सही पर लगाये तो तुमने हैं…

(6)

दिल की ख्वाहिश को नाम क्या दूँ,
प्यार का उसे पैगाम क्या दूँ,
दिल में दर्द नहीं, उसकी यादें हैं,
अब यादें ही दर्द दे, तो उसे इल्ज़ाम क्या दूँ…


(7)

दिल पे आये हुए इल्ज़ाम से पहचानते हैं,
लोग अब मुझको तेरे नाम से पहचानते हैं…

Bewafa Ilzam Shayari

(8)

मोहब्बत तो दिल से की थी,
दिमाग उसने लगा लिया,
दिल तोड़ दिया मेरा उसने,
और इल्जाम मुझपर लगा दिया…


(9)

लफ्जों से इतना आशिकाना ठीक नहीं है ज़नाब,
किसी के दिल के पार हुए तो इल्जाम क़त्ल का लगेगा…


(10)

हँस कर कबूल क्या कर ली सजाएँ मैंने,
ज़माने ने दस्तूर ही बना लिया,
हर इलज़ाम मुझ पर मढ़ने का…