Hisab Shayari in Hindi - हिसाब शायरी

Hisab Shayari in Hindi

(1)
जब इश्क करता हूँ मैं तो टूट कर करता हूँ,
ये काम मुझे जरूरत के हिसाब से नहीं आता…


(2)
अमीरी का हिसाब तो दिल देख के कीजिये साहेब,
वरना गरीबी तो कपड़ो से ही झलक जाती है…


(3)
कभी उनकी याद आती है कभी उनके ख्व़ाब आते हैं,
मुझे सताने के सलीके… तो उन्हें बेहिसाब आते हैं…


(4)
ख़्वाबों पर इख़्तियार न यादों पे ज़ोर है,
कब ज़िंदगी गुज़ारी है अपने हिसाब में…


(5)
तेरी मोहब्बत में हम बैठें हैं चोट खाए,
जिसका हिसाब न हो सके उतने दर्द हमने पाये,
फिर भी तेरे प्यार की कसम खाके कहता हूँ,
हमारे लब पर तेरे लिये सिर्फ और सिर्फ दुआ आये…


(6)
अगर मोहब्बत की हद नहीं कोई,
तो दर्द का हिसाब क्यूँ रखूं…


(7)
खुशियों की चाह थी वहां बे-हिसाब ग़म निकले,
बेवफा तू नहीं सनम बद-नसीब तो हम निकले…


(8)
हर बात मानी है तेरी सिर झुका कर ऐ ज़िंदगी,
हिसाब बराबर कर तू भी तो कुछ शर्तें मान मेरी…


(9)
कर रहा था ग़म-ए-जहाँ का हिसाब,
आज तुम याद आये तो बेहिसाब आये…


(10)
बेवक़्त, बेवजह, बेहिसाब मुस्कुरा देता हूँ,
आधे दुश्मनो को तो यूँ ही हरा देता हूँ…