Hawa Shayari in Hindi - हवा पर शायरी

Hawa Shayari in Hindi

(1)
अज़ब तरीके से छुआ है हवा ने मेरे रुखों को,
कहीं तुमने इसे चूम ❤️ के तो नहीं भेजा था…


(2)
चूर चूर हो गया सरफिरी हवाओं का सारा ग़ुरूर,
इक दिया खुली छत पर रातभर जलता रहा…


(3)
खुली किताब के सफ़्हे उलटते रहते हैं,
हवा चले न चले दिन पलटते रहते हैं…


(4)
सुबह का हर पल ज़िंदगी दे आपको,
दिन का हर लम्हा खुशी दे आपको,
जहाँ ग़म की हवा छू कर भी न गुज़रे,
ख़ुदा वो जन्नत सी ज़मीन दे आपको…


(5)
मैं दिया हूँ मेरी तो अंधेरों से दुश्मनी है,
हवा तो बेवजह मेरे खिलाफ है…


(6)
ये मौसम भी कितना ❤️ प्यारा है,
करती ये हवाएं कुछ इशारा है,
जरा समझो इनके जज्बातों को,
ये कह रही हैं किसी ने दिल से पुकारा है…


(7)
आज हल्की हल्की बारिश है,
सरद हवा का रक्स भी है,
आज फूल भी निखरे निखरे हैं,
उनमे तुम्हारा अक्स भी है…


(8)
एक पल में आकर गुजर जाये,
ये हवा का वो झोका है ओर कुछ नहीं,
प्यार कहती है दुनिया जिसे,
एक रंगीन धोका है और कुछ नहीं…


(9)
अपनी मर्ज़ी से कहाँ अपने सफ़र के हम हैं,
रुख़ हवाओं का जिधर का है उधर के हम हैं…


(10)
रात गुज़री तो फिर महकती सुबह आयी,
दिल ❤️ धड़का फिर आपकी याद आयी,
आँखो ने महसूस किया उस हवा को,
जो आपको छूकर हमारे पास आयी…