Ghar Shayari in Hindi - घर शायरी

Ghar Shayari in Hindi

(1)

आज फिर घर में कैद
हर हस्ती हो गई,
जिन्दगी महँगी और
दौलत सस्ती हो गई….


(2)

Home Shayari

कभी दिमाग कभी दिल
कभी नजर में रहो,
ये सब तुम्हारे ही घर है,
किसी भी घर में रहो…


(3)

आईना देख कर तसल्ली हुई,
हमको इस घर में जानता है कोई…


(4)

अपने मेहमान को पलकों पे बिठा लेती है,
गरीबी जानती है घर में बिछौने कम है….


(5)

लोग टूट जाते है एक घर बनाने में,
तुम तरस नहीं खाते बस्तियाँ जलाने में…

Ghar Ki Yaad Shayari

(6)

थक चुका हूँ
मेहमान की तरह घर आते-आते,
बेघर हो गये है हम
चंद रूपये कमाते-कमाते…


(7)

काश मेरा घर तेरे घर के करीब होता,
बात करना न सही देखना तो नसीब होता…

घर शायरी

(8)

इंसान चाहता है कि उसे उड़ने को पर मिले,
परिंदा चाहता है कि उसे रहने को घर मिले…


(9)

दोस्ती कब और किस से हो जाएँ अंदाजा नहीं होता है,
दिल एक ऐसा घर है जिस में दरवाजा नहीं होता है…


(10)

उस को रूखसत तो किया था मुझे मालूम न था,
सारा घर ले गया घर छोड़ के जाने वाला…