Dillagi Shayari in Hindi - दिल्लगी शायरी

Dillagi Shayari in Hindi

दिल का दर्द एक राज बनकर रह गया,
मेरा भरोसा मजाक बनकर रह गया,
दिल के सोदागरो से दिललगी कर बैठे,
शायद इसीलिए मेरा प्यार इक अल्फाज बनकर रह गया।


मैंने हक दिया है तुझको
मेरे साथ दिल्लगी का
हमारे दिल से खेल जब तक
तेरे दिल बेहाल ना जाए…


दोस्त बनकर इस कदर दुश्मनी की है
जैसे नाजुक आईने से दिल्लगी की है
जो इक नजर देखने से ही बिखर गया
यूँ रोकर, बसर हमने जिंदगी की है


आपने तो की थी दिल्लगी मगर
हम तो दिल अपना तोड़ बैठे
आपने समझा प्यार को खेल मगर
हम तो ग़मों से नाता जोड़ बैठे


अब तो मुझको लोग तेरे नाम से पहचानते हैं
दिल्लगी में रुतबा हमने भी पाया है
ये मज़ा था दिल्लगी का कि बराबर आग लगती,
न तुम्हें क़रार होता न हमें क़रार होता

Dillagi Love Shayari in Hindi

हमने भी बहुत दिल लगा कर देख लिया है,
चलो थोड़ी दिल्लगी भी कर ले,
जहां वफ़ा नहीं जीत सकी,
थोड़ी बेवफाई ही आज़मा ले…


ये मज़ा था दिल्लगी का कि बराबर आग लगती
न तुम्हें क़रार होता न हमें क़रार होता..


आपकी इस दिल्लगी में हम अपना दिल खो बैठे
कल तक उस खुदा के थे आज आपके हो बैठे
प्यार सुना तो था दिवाना कर देता है
आज खुद करके हम भी होश खो बैठे


अनछुए अरमानों को दिलके,
अब तेरी ही सूरत है…
इजाजत हो ना हो किसी की,
तुझसे दिल्लगी की सहूलत है…