Dhokebaaz Shayari in Hindi - धोकेबाज़ शायरी

Dhokebaaz Shayari in Hindi

(1)
जब दोस्त ही शामिल हो,
दुश्मनों की चाल में,
तब शेर भी फास जाता है,
मकड़ी की जाल में…


(2)
पहले ज़िंदगी छीन ली मुझसे,
अब वो मेरी मौत का भी फ़ायदा उठाती है,
मेरी क़बर पे फूल चढाने के बहाने,
वो किसी और से मिलने आती है…


Dhokebaaz Dost Shayari

(3)
जो गद्दार दोस्त, दोस्त की आंखों में आंसू लाते है
वह क्यों भूल जाते हैं कि उनके पास भी दो आंखें है…


(4)
हर वक्त मेरी जुबां पर दोस्तों का ही नाम आया,
पर मेरे बुरे वक्त में कोई दोस्त न काम आया…


(5)
समझ लेते हैं हम उनकी दिल की बात को,
वो हमें हर बार धोका देते है,
लेकिन हम भी मजबूर हैं दिल से,
जो उन्हें बार बार मौका देते हैं…

(6)
जीते जी छीन ली जिंदगानी मेरी,
वो अब मृत्यु का भी उठाती हे,
मेरी कबर पर माला के बहाने,
किसी आशिक से मिलने आती है…


(7)
बड़ा गुरूर मुझको मेरे यार पर था,
बाद में पता चला मेरा ऐतबार इक गद्दार पर था…


(8)
तेरी दोस्ती ने दिए सुकून इतना,
कि तेरे बाद कोई भी अच्छा न लगे,
तुझे करनी हो बेवफाई तू इस अदा से करना,
कि तेरे बाद कोई भी बेवफा न लगे…


(9)
क्षण क्षण उसका साथ देते हम,
एक इशारे पर संसार छोड़ जाते हम,
दरिया के बिच मे पहुच कर धोखा किया उसने,
वो कहते तो किनारे पर ही डूब जाते हम…


(10)
अनजाने में दिल गँवा बैठे,
इस प्यार में कैसे धोखा खा बैठे,
उनसे क्या गिला करे, भूल तो हमारी थी,
जो बिना दिल वालों से दिल लगा बैठे..