Deedar Shayari in Hindi - दीदार शायरी

Deedar Shayari in Hindi

(1)
दीदार की तलब हो तो नज़रे जमाये रख,
क्यूँकि नक़ाब हो या नसीब सरकता जरुर है…


(2)
आज दिल ने तेरे दीदार की ख्वाहिश रखी है,
मिले अगर फुरसत तो ख्वाबों मे आ जाना…


(3)
तलब उठती है बार-बार तेरे दीदार की,
ना जाने देखते-देखते कब तुम लत बन गये…


(4)
एतबार कर दीदार में एहतियात नहीं होता,
बेहिसाब जज़्बा है इसमें हिसाब नहीं होता…


(5)
तलब ऐसी कि बसा लें अपनी साँसो में तुझे हम,
और किस्मत ऐसी कि दीदार के भी मोहताज हैं हम…


(6)
चमन में इस कदर तू आम करदे अपने जलवों को,
कि आँखें जिस तरफ उठें तेरा दीदार हो जाये…


(7)
तेरे दीदार पर अगर मेरा इख्तियार होता,
ये रोज-रोज होता और बार बार होता…


(8)
हर बार इल्जाम हम पर लगाना ठीक नहीं,
वफ़ा खुद से नहीं होती खफा हम पर होते हो…


(9)
वो ढूढ़ रहे थे मुझ को भूल जाने के तरीके,
खफा हो कर उनकी मुश्किल आसान कर दी हमने…


(10)
वो आए थे मेरा दुख-दर्द बाँटने के लिए,
मुझे खुश देखा तो खफा होकर चल दिये…