Chand Shayari in Hindi - चाँद पर शायरी

Chand Shayari in Hindi

(1)

चाँद का क्या कसूर अगर रात बेवफा निकली,
कुछ पल ठहरी और फिर चल निकली,
उन से क्या कहे वो तो सच्चे थे शायद,
हमारी तकदीर ही हमसे खफा निकली….


(2)

सुन्दरता का मुक़ाबला, अपने पूरे शबाब पर होगा,
आज एक चाँद दूसरे चाँद के इंतज़ार में होगा…


(3)

सूरज, चाँद और सितारे मेरे साथ में रहे,
जब तक तुम्हारा हाथ मेरे हाथ में रहे,
शाखों से जो टूट जाये वो पत्ता नहीं हैं हम,
आंधी से कोई कह दे कि औकात में रहे….


(4)

न चांद होगा ना तारे होंगे,
क्या हम इस साल भी कुंवारे होंगे ,
इस दुनिया में कितनों के निकाह हो गए ,
क्या हमारे नसीब में सिर्फ निकाह के छुहारे होंगे….


(5)

ऐ चांद आज जरा सोच समझ कर निकलना,
यार मेरे चांद को भूखा रहने की आदत नहीं है….

Chand Nazar Aaya Shayari

(6)

चांदनी रात बड़ी देर के बाद आयी,
ये मुलाक़ात बड़ी देर के बाद आयी,
आज आये हैं वो मिलने को बड़ी देर के बाद,
आज की रात बड़ी देर के बाद आयी…


(7)

चाँद से फूल से या मेरी जुबां से सुनिए,
हर तरफ आप का किस्सा है जहां से सुनिए…


(8)

चाँद भी सूरज से ही चमकता है,
फुल खिलने के बाद ही महकता है,
सनम प्यार करने वाले कहते नहीं..
उनकी आँखों से प्यार छलकता है…..


(9)

उतरा है मेरे दिल में कोई चाँद नगर से,
अब खौफ ना कोई अंधेरों के सफ़र से,
वो बात है तुझ में कोई तुझ सा नहीं है,
कि काश कोई देखे तुझे मेरी नजर से….


(10)

चाँद भी झाँकता है खिड़कियों से,
मेरी तन्हाईयों की चर्चा अब आसमानों में है