Bulandi Shayari in Hindi - बुलंदी शायरी

Bulandi Shayari in Hindi

(1)

हौसले बुलंद कर रास्तों पे चल दे,
तुझे तेरा मुकाम मिल जायेगा,
बढ़ कर अकेला तू पहल कर,
देखकर तुझको काफिला खुद बन जायेगा…


(2)

लहरों को साहिल की दरकार नही होती,
हौसलें बुलंद हो तो कोई दीवार नही होती,
जलते हुए चिराग ने आँधियों से ये कहा,
उजाला देने वालों की कभी हार नही होती…

Bulandi Ki Shayari

(3)

भरोसा ‘‘ईश्वर’’ पर है तो,
जो लिखा है तकदीर में वो ही पाओगे,
मगर भरोसा अगर खुद पर है,
तो ईश्वर वही लिखेगा, जो आप चाहोगे…


(4)

भीङ में खङा होना मकसद नहीं हैं मेरा,
बल्कि भीङ जिसके लिए खडी है वो बनना है मुझे…


(5)

जिन्दगी काँटों का सफर हैं,
हौसला इसकी पहचान हैं,
रास्ते पर तो सभी चलते हैं,
जो रास्ते बनाए वही इंसान हैं…

Bulandi Ko Chune Wali Shayari


(6)

खोल दे पंख मेरे कहता हैं परिंदा,
अभी और उड़ान बाकी हैं,
जमी नही है मंजिल मेरी, अभी पूरा आसमान बाकी हैं,
लहरों की ख़ामोशी को समंदर की बेबसी मत समझ ए नादान,
जितनी गहराई अंदर हैं, बाहर उतना तूफ़ान बाकी हैं…


(7)

अभी को असली मंजिल पाना बाकी है,
इरादों का इम्तिहान बाकी है,
अभी तो तोली है मुट्ठी भर जमीन,
तोलना आसमान बाकी है…

Bulandi Mubarak Shayari

(8)

सफर में मुश्किलें आये तो हिम्मत और बढ़ती है,
कोई अगर रास्ता रोके, तो जुर्रत और बढ़ती है,
अगर बिकने पे आ जाओ तो घट जाते है दाम अक्सर,
ना बिकने का इरादा हो तो कीमत और बढ़ती है…


(9)

मँजिले बड़ी जिद्दी होती हैँ,
हासिल कहाँ नसीब से होती हैं,
मगर वहाँ तूफान भी हार जाते हैं,
जहाँ कश्तियाँ जिद पर होती है…


(10)

मुश्किल नही है कुछ दुनिया में,
तू जरा हिम्मत तो कर,
ख्वाब बदलेंगे हकीकत में,
तू जरा कोशिश तो कर…