Bird Shayari in Hindi - पंछी पर शायरी

Bird Shayari in Hindi
पंछी पर शायरी

समझौतों की भीड़ भाड़ में सबसे रिश्ता टूट गया,
इतने घुटने टेके हमने, आखिर घुटना ही टूट गया,
देख शिकारी तेरे कारण एक पंछी टूट गया,
पत्थर का तो कुछ नहीं बिगड़ा, लेकिन शीशा टूट गया…


आजाद पंछी बनने का मजा ही अलग है,
अपनी शर्तो पर जीने का नशा ही अलग है…


ये पेड़ ये पत्ते ये शाखें भी परेशान हो जाएं,
अगर पंछी भी हिन्दू और मुस्लमान हो जाएं…


इंसान चाहता है कि उसे उड़ने को पर मिले,
पंछी चाहता है कि उसे रहने को घर मिले…


मेरा हौसला भी आसमान छूने लगता है
कई छोटी-बड़ी बातों को सोचकर,
उस छोटी सी चिड़ियाँ का गिरकर उड़ना और
उसका अपने पंखों पर विश्वास देखकर…


इंसान ने अपना घर बनाने के चक्कर में
पेड़ो को काट दिया और मेरा घर उजाड़ दिया
घर के दीवारों को देखता पंछी
पूरी रात यही सोचते-सोचते गुजार दिया…