Aashiqui Shayari in Hindi - आशिकी शायरी

Aashiqui Shayari in Hindi

(1)

तेरे शहर में आके बदनाम हो गए,
तेरी चाहत में अपनी मुस्कान खो गए,
जो डूबे तेरी मोहब्बत में तो ऐसे डूबे,
कि जैसे तेरी आशिकी के गुलाम हो गए…


(2)

दिल की किताब में गुलाब उनका था,
रात की नींदों में ख्वाब उनका था,
कितना प्यार करते हो जब हमने पूछा,
मर जायेंगे तुम्हारे बिना ये जवाब उनका था…


(3)

इश्क करती हूँ तुझसे अपनी जिंदगी से ज्यादा,
मैं डरतीं हूँ मौत से नही तेरी जुदाई से ज्यादा,
चाहे तो हमे आज़मा कर देख किसी और से ज्यादा,
मेरी जिंदगी में कुछ नही तेरी आशिकी से ज्यादा…


(4)

तू चाँद मैं सितारा होता,
आसमान में एक आशियां हमारा होता,
लोग तुझे दूर से देखा करते और,
सिर्फ पास रहने का हक हमारा होता…


(5)

इस नजर ने उस नजर से बात करली,
रहे खामोश मगर फिर भी बात करली,
जब मोहब्बत की फ़िज़ा को खुश पाया,
तो दोनों निगाहों ने रो रो कर बरसात करली…

(6)

तू तोड़ दे वो कसम जो तूने खाई है,
कभी कभी याद करने में क्या बुराई है,
तुझे याद किये बिना रहा भी तो नही जाता,
तूने दिल में जगह जो ऐसी बनाई है…


(7)

इश्क सभी को जीना सीखा देता है,
वफ़ा के नाम पर मरना सीखा देता है,
इश्क नही किया तो करके देखना,
ज़ालिम हर दर्द सहना सिखा देता है…


(8)

प्यार मोहब्बत आशिकी ये बस अल्फाज थे,
मगर…जब तुम मिले तब इन अल्फाजो को मायने मिले…


(9)

मेरे प्यार की पहचान तू ही तो हैं,
मेरे जीने का अरमान तू ही तो हैं,
कैसे बयाँ करे आलम इस दिल का,
मेरी आशिकी मेरी जान तू ही तो हैं…


(10)

आशिक़ी दिल-लगी नहीं दिल की लगी होती है,
मुहोब्बत जब भी होती है बे-मुरव्वत से होती है…

(11)

ना जाने आशिक़ी में कितने अफसाने बन जाते है,
शमां जिसको भी जलाती है वो परवाने बन जाते है,
कुछ हासिल करना ही आशिको की मंजिल नही होती,
किसी को खोकर भी कुछ लोग दिवाने बन जाते है…


(12)

तेरे शहर में आके बेनाम हो गए,
तेरी चाहत में अपनी मुस्कान ही खो गए,
जो डूबे तेरी मोहब्बत में तो ऐसे डूबे,
की जैसे तेरी आशिक़ी के गुलाम ही हो गए…


(13)

समुंदर बहा देने का जिगर तो रखते है लेकिन,
हमें आशिकी की नुमाइश की आदत नहीं है…


(14)

आदत है या तलब, इश्क है या चाहत,
तू दिल मे है या साँसों मे,
दीवानगी है या मेरी आशिकी,
तू ज़िन्दगी है या फिर एक किस्सा,
पर जो भी है सिर्फ तू है…


(15)

प्यार मोहब्बत आशिकी ये बस अल्फ़ाज थे,
मगर जब तुम मिले तब इन अलफ़ाजो को मायने मिले…

(16)

तेरा मेरा रिश्ता है कैसा, एक पल दूर गवारा नहीं,
तेरे लिए हर रोज़ हैं जीते, तुझ को दिया मेरा वक़्त सभी,
कोई लम्हा मेरा ना हो तेरे बिना, हर सांस पे नाम तेरा…
क्यूंकि तुम ही हो, अब तुम ही हो
ज़िन्दगी अब तुम ही हो…
चैन भी, मेरा दर्द भी,
मेरी आशिक़ी अब तुम ही हो…


(17)

इश्क करती हूँ तुझसे अपनी जिंदगी से ज्यादा,
मैं डरतीं हूँ मौत से नही तेरी जुदाई से ज्यादा,
चाहे तो हमे आज़मा कर देख किसी और से ज्यादा,
मेरी जिंदगी में कुछ नही तेरी आशिकी से ज्यादा…


(18)

प्यार मोहब्बत आशिकी ये बस अल्फाज थे,
मगर…जब तुम मिले तब इन अल्फाजो को मायने मिले…


(19)

आदत है या तलब, इश्क है या चाहत
तू दिल मे है या साँसों मे,
दीवानगी है या मेरी आशिकी,
तू ज़िन्दगी है या फिर एक किस्सा,
पर जो भी है सिर्फ तू है…


(20)

कोई देखे नही आशिकी उम्र भर,
मनाती रहा मै नाखुशी इस कदर,
नाम उसका लबों पर ना आया कभी,
यूँ निभाती रही आशिकी उम्र भर…


(21)

प्यार कहते है आशिकी कहते है,
कुछ लोग उसे बंदगी कहते है,
मगर जिसके साथ हमें मोहब्बत है,
हम उन्हें अपनी जिन्दगी कहते है…