Aarakshan Shayari in Hindi - आरक्षण पर शायरी

Aarakshan Shayari in Hindi

(1)
राम राम करते इक दिन तुम अस्सलाम हो जाओगे,
बंटने पर ही अड़े रहे तो फिर गुलाम हो जाओगे…


(2)
अब हम लड़ने आये हैं आरक्षण वाली रोटी पर,
जैसे कुत्ते झगड़ रहे हों कटी गाय की बोटी पर…


(3)
हमने कलम किताब लगन को दूर बहुत ही फेंका है,
नाकारों को खीर खिलाना संविधान का ठेका है…


(4)
मैं भी पिछड़ा,मैं भी पिछड़ा,
कह कर बनो भिखारी जी,
ठाकुर, पंडित, बनिया,
सब के सब कर लो तैयारी जी…


(5)
देश मरे भूखा चाहे,
पर अपना पेट भराओ जी,
शर्माओ मत ओ आरक्षण वालो,
भारत माँ के बाल नोचने आओ जी…

Reservation Shayari

(6)
तेरा हिस्सा मेरा हिस्सा,
किस्सा बहुत पुराना है,
हिस्से की रस्साकसियों में,
भूल नही ये जाना है…


(7)
मैं पटेल हूँ मैं गुर्जर हूँ,
लड़ते रहिये शानों से,
फिर से तुम जूते खाओगे,
गजनी की संतानो से…


(8)
आओ मिलकर आग लगाएं,
नित नित नूतन स्वांग करें,
पौरुष की नीलामी कर दें,
आरक्षण की मांग करें…


(9)
पहले से हम बंटे हुए हैं,
और अधिक बंट जाएँ हम,
100 करोड़ हिन्दू है,
मिलकर इक दूजे को खाएं हम…


(10)
आओ इन्ही बहानों को लेकर,सड़कों पर टूट पड़ो,
अपनी अपनी बिरादरी का झंडा लेकर छूट पड़ो…